हीरो नहीं एक्टर बनने की ख्वाहिश निशांत कुमार

निशांत कुमार फिल्म यह है जजमेंट हैंग्ड टिल डेथ के जरिए बॉलीवुड में इंट्री ले रहे हैं। याकूब मेनन की जिंदगी पर आधारित इस फिल्म में अपने कैरेक्टर को वह बेहद चुनौतीपूर्ण बता रहे हैं। वह हिन्दी सिनेमा में अपनी अलग छाप छोड़ना चाहते हैं। पटना के रहने वाले और फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर के बेटे निशांत ने मास मीडिया की पढ़ाई की थी ताकि पत्रकार बन सकें , लेकिन बीच में ही एक्टिंग में आने का फैसला कर लिया। हिन्दी सिनेमा में लोग अपना करियर किसी बड़ी और रोमांटिक फिल्म से शुरू करने आते हैं, ऑफ बीट फिल्म से नहीं। हालांकि ऐसी फिल्मों में काम करना जोखिम भरा होता है, लेकिन इसमें अपने एक्टिंग टैलेंट को दिखाने का भरपूर मौका मिल जाता है। कुछ ऐसी ही सोच के साथ कदम रखा है निशांत ने। हीरो के बजाय एक्टर के रूप में अपनी छाप छोड़ने की ख्वाहिश लेकर इन्होंने ‘‘यह है जजमेंट हैंग्ड टिल डेथ’ साइन किया। याकूब मेमन की लाइफ से इंस्पायर इस फिल्म में निशांत लीड रोल में हैं। निशांत बिहार की राजधानी पटना से हैं। बचपन से ही फिल्में देखने का शौक रहा है। इनके पिता प्रमोद शर्मा पिछले 25 वर्षो से पटना में ही हिंदी फिल्मों के डिस्ट्रिब्यूटर हैं। निशांत ने पटना से ही पढ़ाई की। बाद में नोएडा से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। फिर एक साल का डिप्लोमा कोर्स सिनेमा में किया। उसी दौरान इनके भीतर एक्टिंग का जुनून सवार हो गया। लेकिन उसके पहले कुछ वर्ष दिल्ली में थिएटर से जुड़े ताकि खुद को ट्रेंड कर सकें। उसके बाद 2011 में मुंबई का रुख किया। यहां उन्होंने अनुपम खेर के एक्टिंग इंस्टिट्यूट से एक्टिंग की बारीकियां सीखीं। उसके बाद ऑडिशन देने का सिलसिला शुरू किया। प्रोड्यूसर्स और डायरेक्टर्स से मिलने लगे। कई लोगों से मुलाकात हुई, लेकिन काम नहीं मिल रहा था। कई बार निराशा भी घेर लेती थी, लेकिन हौसला नहीं छोड़ा। फिर एक ऑडिशन के दौरान ही डायरेक्टर मन कुमार से मुलाकात हुई और उन्होंने यह फिल्म ऑफर कर दी। यह है जजमेंट हैंग्ड टिल डेथ के बारे में निशांत का कहना है कि ‘‘यह पूरी तरह से एक फिक्शनल स्टोरी है, लेकिन डायरेक्टर-राइटर मन कुमार ने याकूब मेमन की लाइफ से इंस्पायर होकर इसकी स्क्रिप्ट लिखी है। मैं यह नहीं कह सकता कि यह फिल्म याकूब मेमन की बायोपिक है, जिसे 1993 के मुंबई ब्लास्ट केस में फांसी दे दी गई थी। फिल्म में मेरे कैरेक्टर का नाम आरिफ है।’ निशांत ने याकूब मेमन पर काफी रिसर्च की।

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उसके कुछ वीडियोज देखे। उसकी बॉडी लैंग्वेज और बातचीत करने के तरीके को सही से समझा। फिल्म में आरिफ की पूरी लाइफ की जर्नी दिखाई गई है। उसकी कॉलेज लाइफ से लेकर जेल जाने तक और फिर फांसी होने तक के सफर को कैप्चर किया है। निशांत बताते हैं, ‘‘पहले मैं कॉलेज ब्वॉय बना हूं, इसके बाद बिजनेसमैन के रूप में नजर आऊंगा, फिर कैदी के रूप में दिखाई दूंगा। कुल मिलाकर मेरे लिए डेब्यू फिल्म है और मेरा कैरेक्टर काफी रफ टफ और बेहद चैलेंजिंग है।‘‘ फिल्म में नीतू वाधवा इनकी पत्नी रुखसार की भूमिका में हैं। इसके अलावा फिल्म में अमित सिंह, अमरजीत शाह, दीपक आनंद, करण आहुजा, गुलशन तुशीर, प्राजक्ता शिंदे और प्रकाश कुकड़े भी हैं। निशांत बॉलीवुड में अपनी एक अलग पहचान कायम करना चाहते हैं। इनका मानना है कि हीरो तो कोई भी बन सकता है, लेकिन एक्टर बनना सबके बस की बात नहीं है। ‘‘मैं बतौर एक्टर बेहतरीन छाप छोड़ना चाहता हूं ताकि दर्शक लंबे अरसे तक याद रख सकें।

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